विपक्षी पार्टियों ने डा. थोबा को अपने खेमे में शामिल होने का दिया प्रस्ताव
डा. सुभाष थोबा मसीही भाईचारे व अल्पसंख्यक भाईचारे में बड़ा प्रभाव

पंजाब अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव डा. सुभाष थोबा की ओर से दिए गए इस्तीफे के बाद प्रदेश कांग्रेस हाईकमान में घमासान मच गया है। डा. थोबा कांग्रेस के बड़े नेताओं में गिने जाते थे और मसीही भाईचारे तथा अल्पसंख्यक भाईचारे में उनका खासा प्रभाव एवं आधार रहा है। अचानक डा. सुभाष थोबा द्वारा दिए गए इस्तीफे के बाद पंजाब व केंद्रीय कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें मनाने की कवायद शुरू कर दी हैं। इसी बीच आम आदमी पार्टी, भाजपा व शिरोमणि अकाली दल के नेता भी उनके संपर्क में हैं।
यहां बताना जरूरी है कि डा. सुभाष थोबा पर दो महीनों में दो बार हमला हुआ। इन हमलों में वह बाल बाल बचे। हालांकि उनका साथी साजन बीरबल गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके बाद डा. थोबा व उनकी पत्नी के मोबाइल नंबर पर धमकी भरे फोन आए। डा. थोबा ने इसकी शिकायत पुलिस को दी थी। डीजीपी लॉ एंड आर्डर अर्पित शुक्ला की ओर से मामले की जांच के आदेश दिए थे। डा. सुभाष ने इस संबंध में अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह ओजला को फोन किया, पर उन्होंने फोन नहीं उठाया। डा. सुभाष थोबा के अनुसार जिस समय उन पर हमला हुआ वह गुरजीत सिंह औजला के पक्ष में चुनाव प्रचार के बाद घर वापस लौट रहे थे। अचानक पुतलीघर पर उन पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। इस घटना के बाद आहत हुए डा. थोबा ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। डा. थोबा ने कहा कि अभी यह तय नहीं किया है कि वह किस पार्टी में जाएंगे। ईसाई भाईचारे के नेता दर्शन माहल ने कहा कि डा. सुभाष थोबा ईमानदार और बेदाग छवि के नेता हैं। उन्होंने हमेशा अल्पसंख्यक भाईचारे की सेवा की है। कांग्रेस नेताओं ने उनकी अनदेखी की।
